एसीबी ने दो डॉक्टरों के खिलाफ पेश किया एसीबी कोर्ट में चालान


 

 भीलवाड़ा/ कोटा। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कोटा ने  तत्कालीन चिकित्सा अधिकारी प्रभारी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र डग, झालावाड डॉ0 त्रिलोक शर्मा  और तत्कालीन ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी, पिडावा (डग)  झालावाड डॉ0 त्रिलोक शर्मा के खिलाफ एसीबी कोर्ट में चालान पेश किया है।

 एसीबी चौकी कोटा शहर व एसीबी स्पेशल यूनिट कोटा के प्रभारी एएसपी विजय स्वर्णकार  ने बताया कि बीएचएन को बताया कि 10 मई 2018 को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र डग के हेल्पर श्यामदास ने एसीबी चौकी कोटा शहर पर  एक प्रार्थना पत्र पेश किया कि वह,14 मार्च 2017 से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र डग में आर0एम0आर0एस0 के माध्यम से सोनोग्राफी कक्ष में हेल्पर के पद पर 4500 रुपये मानदेय पर लगा हुआ है। मार्च 2017 से उसे कोई वेतन भुगतान नहीं किया गया। वेतन के भुगतान के लिये वह  लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ0 विकास जैन से मिला। उन्होंने सी.एच.सी. इन्चार्ज डॉ0 त्रिलोक शर्मा से मिलने व उनसे खर्चे पानी की बात करने के लिए कहा। जिस पर वह डॉ0 त्रिलोक शर्मा से मिला तो उन्होंने मुझसे मेरी सैलरी का चैक बनवाने की एवज में मेरी कुल सैलेरी का आधा 27.000/- रुपये रिश्वत की मांग की तथा कहा कि उनमें से 9,000-9,000 रुपये ब्लॉक व जिला चिकित्सा अधिकारी के भी है, जिन्हें यह रुपये मैं दे दूंगा।  14. मई 2018 को रिश्वत मांग का गोपनीय सत्यापन करवाया गया। सत्यापन वार्ता में आरोपी डॉ0 त्रिलोक शर्मा द्वारा परिवादी की तनख्वाह का चैक बनाने की एवज में 27,000 रुपये की रिश्वत की मांग की गई। परिवादी के आग्रह करने पर डॉ0 त्रिलोक शर्मा 27,000 रुपये में से 15,000 रुपये प्रथम किश्त के रूप में लेने हेतु सहमत हुआ। सत्यापन वार्ता के दौरान डॉ0 विकास जैन ने भी परिवादी को डॉ0 त्रिलोक शर्मा को रिश्वत राशि देने हेतु कहा।  15 मई 2018 को ट्रेप कार्यवाही का आयोजन किया गया किन्तु आरोपीगण को किसी प्रकार शक हो जाने के कारण परिवादी से रिश्वत राशि प्राप्त नहीं करने से ट्रेप कार्यवाही नहीं हो सकी। डॉ0 विकास जैन को परिवादी से आरोपी डॉ0 त्रिलोक शर्मा द्वारा रिश्वत राशि मांगी जाने की जानकारी थी एंव उसके द्वारा परिवादी को उसके मानदेय के भुगतान के बदले अवैध रिश्वत राशि डॉ0 त्रिलोक शर्मा को देने के लिए कहकर दुष्प्रेरित किया गया। इस प्रकार डॉ0 त्रिलोक शर्मा द्वारा परिवादी के मानदेय के भुगतान करने की एवज में रिश्वत राशि की मांग की गई तथा डॉ0 विकास जैन द्वारा उच्चाधिकारी होने के उपरान्त भी जानबूझकर डॉ0 त्रिलोक शर्मा के विरुद्ध विधिक कार्यवाही का लोप किया गया रिश्वत राशि डॉ0 त्रिलोक शर्मा को देने के लिए दुष्प्रेरित किया गया। इस पर ए0सी0बी0 मुख्यालय  पर प्रकरण संख्या 339 / 2018 डॉ0 त्रिलोक शर्मा व डॉ0 विकास जन के विरुद्ध दर्ज किया गया।

 प्रकरण का अनुसंधान एसीबी स्पेशल यूनिट कोटा के सीआई रमेशचन्द आर्य ने किया। प्रकरण में अनुसंधान से दोनों आरोपीगण के विरुद्ध धारा 7.12 पी0सी0 एक्ट 1988 एवं 120 बी आई.पी.सी. का अपराध प्रमाणित पाया जाने पर आरोपीगण डॉ0 त्रिलोक शर्मा व डॉ0 विकास जैन के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति   शासन उप सचिव कार्मिक (क- 3 / शिकायत) विभाग शासन सचिवालय जयपुर से प्राप्त की गई। सम्पूर्ण अनुसंधान से आरोपीगण डॉ0 त्रिलोक शर्मा व डॉ0 विकास जैन के विरूद्ध अपराध प्रमाणित पाया जाने पर  01 अगस्त 2022 को चालान एसीबी कोर्ट कोटा में पेश किया गया। 

 

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