विशाल एवं अनूठी आध्यात्मिक कल्याण पदयात्रा आज: हजारों श्रद्धालु पहुंचेंगे दुर्ग पर

 


निंबाहेड़ा BHN
मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री शेषावतार कल्लाजी वेदपीठ पर विराजित आध्यात्मिक वैदिक एवं लौकिक, त्रिधारा के दिव्यपुंज, ब्रह्मनिष्ट, वेदमूर्ति, मेदपाठ, मणिभूषण, धरादित्य, परम शौर्यशाली श्री शेषवतार कल्लजी, वेदमाता गायत्री, स्कन्दमाता, पंचमुखी हनुमानजी एवं काल भैरव के श्रद्धापूरित विग्रहों के सप्तदश कल्याण महाकुंभ के उपलक्ष में भव्य विशाल एवं अनूठी आध्यात्मिक कल्याण पदयात्रा का आयोजन आज किया जा रहा है जिसकी सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। वेदपीठ के पदाधिकरियों ने बताया कि ज्येष्ट कृष्णा चर्तुदशी को भौर वेला में प्रातः 4ः15 बजे हजारों श्रद्धालु ठाकुर के दर्शन कर पदयात्रा के लिए प्रस्थान करेंगे जो  मुख्य मार्ग से हेाते हुए चित्तौड़ के नेहरू गार्डन पर अल्प विश्राम एवं अल्पाहार के पश्चात विभिन्न राजनेताओं, अधिकारियों एवं श्रद्धालुओं द्वारा ठाकुर के रथ की पूजा के पश्चात दुर्ग के लिए प्रस्थान करेंगे। आर ओ बी कलेक्ट्रेट चौराहा, सुभाष चौक, गोल प्याऊ, सदर बाजार, मिठाई बाजार, लक्ष्मीनाथ मंदिर हेाते हुए सभी श्रद्धालु दुर्ग के प्रथम प्रवेश द्वारा पाडनपोल पर दुर्ग राज के चरण पूजन कर मेवाड़ की आन बान और शान के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले हजारों वीर-वीरांगनाआंे को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर अपने आराध्य ठाकुर श्री कल्लाजी एवं जयमल जी की छत्री पर पहंुचकर पूजा अर्चना करेंगे। वेदपीठ की ओर से सभी भक्तों के दर्शन के पश्चात दुर्ग मार्ग स्थिति प्रताप स्कूल में सभी को भोजन करवाकर बसों से निम्बाहेड़ा के लिए रवाना किया जाएगा। उन्हांेने बताया कि कल्याण नगरी के ठाकुर श्री के मंदिर से लेकर मार्ग के लक्ष्मीपुरा, फाचर, मुरलिया, मांगरोल, भावलिया, रावलिया, सतखण्डा, शंभूपुरा, अरनियापंथ जालमपुरा, ओरड़ी, ओछडी, भाटिया शोरूम, मून्दड़ा पेट्रोलपम्प, कृषि उपज मण्डी रेल्वेस्टेशन सहित मार्ग के विभिन्न स्थानों पर धार्मिक एवं सामजिक संगठनों तथा ग्रामवासियों द्वारा पदयात्रियों का स्वागत अभिनंदन करने के साथ ही ठाकुर जी के रथ की पूजा अर्चना की जाएगी। पदयात्रा में आठ वर्ष से लेकर अस्सी वर्ष तक श्रद्धालु भाग लेंगे। इस दौरान डीजे साउण्ड मालवी ढोल की थाक के साथ भक्तगण अपने आराध्य के जयकारे लगाते हुए ठाकुर जी की छत्री के नीचे चलते हुए जब दुर्ग के प्रथम प्रवेश द्वार में  प्रवेश करेंगे तो वहां का दृश्य किसी चतुरांगिनी सेना से कम नहीं होगा।

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