कर्मचारी मांगो को लेकर चल रहे आंदोलन और गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए की तहसील अध्यक्षों की घोषणा

 

भीलवाड़ा !  राज्य कर्मचारियों की मांगो को लेकर अखिल राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ भीलवाड़ा द्वारा तहसील स्तर तक आंदोलन के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु तहसील अध्यक्षों की नियुक्ति जिलाध्यक्ष नीरज शर्मा द्वारा कर दी गई है जिसमे कुलदीप सेन को मांडल, लादू सिंह सिसोदिया को करेड़ा, दिनेश सिंह शक्तावत को मांडलगढ़, कैलाश कहार को शाहपुरा, भगवत सिंह राजपूत को गंगापुर, राकेश शर्मा को आसींद, गोपेश त्रिवेदी को रायपुर, मनोज बांगड़ को भीलवाड़ा, महेंद्र सिंह राठौड़ को बनेड़ा, सीताराम मीणा को जहाजपुर, रमेश चंद्र तेली को कोटड़ी, विनोद कुमार बैरवा को गुलाबपुरा, उदय लाल कोली को बिजौलिया, महावीर सिंह खींची को बदनोर, नरेंद्र सिंह टांक को हम्मीरगढ़ और शंकर लाल धाकड़ को फूलिया कलां बनाया गया है। नव नियुक्त तहसील अध्यक्ष एक सप्ताह में तहसील कार्यकारिणी की घोषणा करेंगे। आखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ भीलवाड़ा के जिलाध्यक्ष नीरज शर्मा ने बताया कि महासंघ से संबद्ध विभिन्न केडर लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत है और विगत समय हुए समझौते पर भी राज्य सरकार की चुप्पी निराशाजनक है इसी क्रम में 25 दिसंबर को जयपुर में हुए राज्य स्तरीय संघर्ष चेतना महा अधिवेशन में लिए निर्णय अनुसार प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा कर दी गई थी जो इस प्रकार है।

  • ब्लॉक स्तर पर संघर्ष समितियों/तहसील उपषाखाओं/विभागीय समितियों का गठन दिनांक 28 दिसम्बर से 31 दिसम्बर 2022
  • जिला स्तर पर संघर्ष चेतना बैठकें दिनांक 28 दिसम्बर से 31 दिसम्बर 2022
  • समस्त जिला मुख्यालयों पर प्रदेष पदाधिकारियों द्वारा संघर्ष चेतना यात्रा दिनांक 4 जनवरी 2023 से 6 जनवरी 2023
  • समस्त ब्लॉक स्तर पर धरना/प्रदर्शन/ज्ञापन दिनांक 11 जनवरी 2023।
  • समस्त जिला मुख्यालयों पर हजारों वाहनों से आक्रोष रेली दिनांक 18 जनवरी 2023।
  • राजधानी जयपुर में विषाल महा आक्रोष महारैली दिनांक 23 जनवरी 2023

             जिला मंत्री शिव सिंह चौहान ने बताया कि विगत आंदोलनों में सरकार व संगठनों के मध्य हुए लिखित समझौतो/सहमतियों को आज तक लागू नहीं किया जा रहा है, जिससे राज्य कर्मचारियों में सरकार के प्रति आक्रोश व्याप्त है। राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण हेतु कमेटियों का गठन किया गया है जो हास्यास्पद है। विगत सरकार द्वारा गठित डी.सी. सामंत कमेटी की रिपोर्ट उजागर किये बगैर ही खेमराज कमेटी का गठन किया गया जिसकी रिपोर्ट आज दिवस तक लम्बित है। महासंघ का यह मंतव्य है कि राज्य कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान महासंघ एवं सरकार के मध्य द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से किया जावें। कमेटियों पर किये जा रहे निष्फल व्यय से प्रदेश को राजकीय कोषीय घाटा होता है। 

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