जोधड़ास में तोड़े गये चार सौ साल पुराने मंदिर को फिर बनाकर देगी यूआईटी, धरना समाप्त

 


भीलवाड़ा (वि‍जय प्रहलाद)। पुरानी जोधड़ास के चार सौ साल पुराने माताजी के स्थान को नगर विकास न्यास के अतिक्रमण हटाओ दस्ते द्वारा सोमवार को तोडऩे के विरोध में मंगलवार को दूसरे दिन भी ग्रामीणों का धरना जारी रहा। इस बीच न्यास की कार्यवाहक सचिव रजनी माधीवाल और ग्रामीणों के बीच हुई बातचीत में तय किया गया कि न्यास मंदिर बनाने के साथ ही शेष भूमि पर तारबंदी भी करेगी। इसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया। 
नगर विकास न्यास ने एनजीटी के निर्देश पर कोठारी नदी के किनारे से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया था। इसी दौरान पुराने जोधड़ास में लोगों की आस्था का केन्द्र चारा सौ साल पुराने माताजी के स्थान (चबूतरा) पर पीला पंजा चला दिया। माताजी के स्थान को तोडऩे की जैसे ही लोगों को जानकारी मिली। वहां जमा होना शुरू हो गये। भाजपा नेता उदयलाल भडाना, मोहनलाल सराधना के नेतृत्व में वहां धरने पर बैठ गये। पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कालूलाल गुर्जर, शहर विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी भी मंदिर हटाए जाने को लेकर वहां पहुंचे और न्यास अधिकारियों से बातचीत की। इस दौरान कार्यवाहक सचिव रजनी माधीवाल भी वहां पहुंची और आश्वासन दिया कि सुबह फिर यथास्थिति के तहत चबूतरा बनवा दिया जाएगा लेकिन ग्रामीण नहीं माने और जब तक काम शुरू नहीं होता तब तक वे धरने पर रहेंगे। रात्रि को टेंट लगा दिया और घर से मंगवाकर भोजन भी वहीं किया। इसके बाद भजन कीर्तन के कार्यक्रम रात भर चले। 
निर्माण को लेकर हुई नोंकझोंक :
न्यास द्वारा चार सौ साल पुराने माताजी के स्थान को तोडऩे की गलती मान लेने के बाद आज सुबह चबूतरा बनाने की तैयारी की गई लेकिन ग्रामीण करीब तीन चार बिस्वा जमीन पर चारदीवारी की मांग को लेकर अड़ गये। इस बात को लेकर भाजपा नेता उदयलाल भडाणा और न्यास सचिव रजनी माधीवाल के बीच तीखी नोंकझोंक भी हुई है। माधीवाल ने कहा कि हम आपकी जमीन पर कब्जा नहीं कर रहे है। जमीन आपकी है तो आपकी रहेगी। हम चबूतरा बनवाकर दे रहे है लेकिन ग्रामीण पूरी जमीन पर चारदीवारी बनाने पर अड़े रहे। 
समझौते के बाद धरना समाप्त :
ग्रामीणों के धरने पर बैठे रहने के चलते न्यास की कार्यवाहक सचिव माधीवाल ने राजस्व से जुड़े अधिकारियों को बुलवाकर क्षेत्र का नापचोप करवाया बाद में उदयलाल भडाणा, मोहनलाल सराधना, पूर्व मंत्री कालूलाल गुर्जर आदि के साथ बातचीत की। इसमें तय किया गया कि करीब 20 गुणा 20 फीट का चबूतरा न्यास बनाकर देगी। वहीं मंदिर की शेष जमीन पर तारबंदी भी करेगी। इस निर्णय के बाद धरने पर बैठे ग्रामीणों ने अपना आन्दोलन समाप्त कर दिया। 

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