नाबालिग से रेप मामला-सदर थाना पुलिस की लापरवाही, कोर्ट ने लिया गंभीरता से, एसपी को लिखा पत्र

 

 भीलवाड़ा प्रेमकुमार गढ़वाल। नाबालिग को अगवा कर रेप करने के आरोप में दर्ज एक मामले में सदर थाना पुलिस की लापरवाही सामने आई है। पुलिस के मामले में एफआर लगाने के बाद भी समय पर नतीजा कोर्ट में पेश नहीं करने को पोक्सो कोर्ट (एक) के न्यायाधीश देवेंद्रसिंह नागर ने गंभीरता से लिया है। साथ ही पुलिस अधीक्षक को अद्र्धशासकीय पत्र लिखकर निर्देश दिये कि जिले में कार्यरत थानाधिकारियों को भविष्य में पोक्सो संबंधित प्रकरण में संवेदनशीलता के साथ नियमों के तहत कार्रवाई करने व आज्ञा प्रावधानों की पालना करने के लिए निर्देशित किया जाये।  
न्यायालय सूत्रों के अनुसार, सदर थाने में एक सौलह साल की नाबालिग लड़की ने 20 अगस्त 2020 को रिपोर्ट दी कि उसके माता-पिता रिश्तेदारी में गये थे। सुबह 8-9 बजे फूलचंद बंजारा सहित अन्य लोग बोलेरो लेकर उसके घर आये। इन लोगों ने नाबालिग से उसके माता-पिता का एक्सीडेंट होने व अस्पताल में भर्ती होने की बात कही। साथ ही नाबालिग से इन लोगों ने कहा कि उसके माता-पिता ने घर में रखे 50 हजार व जेवर भी मंगवाये हैं। नाबालिग नकदी व गहने लेकर इनके साथ बोलेरो में बैठ गई।  ये लोग उसे बजोगणिया माता के रास्ते में ले गये और रुपये व गहने छीन लिये। उसे जान से मारने की धमकी देते हुये नशीला पदार्थ खिला दिया। इससे वह बेहौश हो। उसे जब हौश आया तो खुद को भिंड में एक मकान में पाया। जहां फूलचंद ने उसके साथ रेप व मारपीट की। इस दौरान अन्य लोग निगरानी कर रहे थे। सदर थाना पुलिस ने पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच की ओर मामले को झूंठा मानते हुये एफआर (अंतिम रिपोर्ट) लगा दी। 13 फरवरी 23 को पुलिस ने एफआर पोक्सो एक कोर्ट में पेश की। 
बता दें कि पोक्सो कोर्ट ने लंबित एफआर के संबंध में सभी थाना अधिकारियों को तत्थ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। इसे लेकर उक्त मामले में सदर थाना की ओर से अंतिम प्रतिवेदन कोर्ट में पेश किया। 
कोर्ट ने माना कि थाना अधिकारी द्वारा एफआर लगाने के पश्चात भी समय पर नतीजा न्यायालय में पेश नहीं किया। इसे  न्यायालय ने गंभीरता से लिया है। न्यायालय ने एफआर मामले में आदेश दिया कि सदर थाने में दर्ज इस प्रकरण में 27 नवंबर 2020 को धारा 164 सीआरपीसी के सकारात्मक बयान होने व 21 नवंबर 20 को उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराये जाने के पश्चात पुलिस ने पोक्सो नियम 4 (3) (सी) (डी) के आज्ञापक प्रावधानों के अनुसार उसके संकलित नमूने तत्काल एफएसएल जांच के लिए नहीं भेजे। पत्रावली पर भी यह कारण स्पष्ट नहीं है। 
27 नवंबर 20 को पीडि़ता के बयान होने से 4 जनवरी 21 को कथित आरोपित से पूछताछ होने तक उसकी गिरफ्तारी का कोई प्रयास किया जाना या उसे गिरफ्तार नहीं करने का कोई कारण भी पुलिस ने पत्रावली पर दर्शित नहीं किया। 
कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारी द्वारा अनुसंधान के दौरान अपनाई गई कार्यशैली यौन अपराध जैसे संवेदनशील प्रकरण में स्वीकार करने योग्य प्रतीत नहीं होती है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक भीलवाड़ा को अद्र्धशासकीय पत्र लिखकर भीलवाड़ा जिले में कार्यरत सभी थाना अधिकारियों को भविष्य में पोक्सो संबंधित प्रकरण में संवेदनशीलता के साथ नियमानुसार कार्यवाही करने व आज्ञापक प्रावधान की पालना करने के लिए और नमुनों को भी तुरंत एफएसएल भेजे जाने के लिए भी पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिये कि वे, समस्त थाना अधिकारियों को निर्देशित करें। 

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